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भास्कर खास: पहले दो क्लब थे, एक समय 6 से ज्यादा बन गए थे क्लब, एक बार बंद होने पर स्वतंत्रता के बाद दिग्गजों ने किया रामलीला को पुनर्जीवित

लाडवा38 मिनट पहलेलेखक: नरेश गर्ग

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शिवाला रामकुण्डी में रावण दहन के बाद भगवान श्री राम के चरित्र में कलाकार अमित सिंघल को दर्शक अपने कंधो पर उठाए  हुए। (2009 की फाइल फोटो)

शहर में रामलीला का इतिहास भारत की अंग्रेजों से आजादी के पहले का है, लेकिन कुछ कारणों की वजह से वह रामलीला आजादी से कुछ समय पहले बंद हो गई। जिसे फिर स्वतंत्रता मिलने के पश्चात सन् 1948 में पुनर्जीवित किया गया। लव कुश थिएट्रिकल क्लब के प्रधान व कई वर्षों तक दशरथ का रोल निभाने वाले कुश गर्ग बताते हैं कि उन्होंने बचपन से ही रामलीला के कलाकारों के बीच समय बिताया है।

क्योंकि न केवल उनके परिवार के बुजुर्ग रामलीला में सक्रिय थे बल्कि आस पड़ोस और परिवारजनों के मित्र भी उसमे लगे थे। जिससे उनकी बातचीत से हमें रामलीला के इतिहास का ज्ञान हुआ।

सन् 48 में बना था क्लब

उनके अनुसार 1948 में लाडवा के दिग्गजों डॉ. विष्णु शर्मा, बाबू रमेश गुप्ता खेड़ी वाले, पूर्व विधायक ओमप्रकाश गर्ग, बाबू धर्मचंद गुप्ता, लाला अमरनाथ व उनके सहयोगियों द्वारा रामा थिएट्रिकल क्लब का गठन किया था। इसके द्वारा शहर के मेन बाजार चौक में रामलीला करने की शुरुआत की गई।

जो बड़ी रामलीला के नाम से पूरे क्षेत्र में प्रचलित थी। उन्होंने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि कलाकार पूरा दिन रिहर्सल किया करते थे। उस समय के कलाकार अपने अभिनय से जीवंत दृश्य प्रस्तुत किया करते थे।

फिर नया बना क्लब

उन्होंने बताया कि लाडवा का इतिहास रहा है कि एक रामलीला क्लब से कुछ कलाकार निकल कर दूसरी रामलीला क्लब तैयार करते थे उसी तरह रामा थिएट्रिकल क्लब से कुछ कलाकारों ने निकल कर बाबू राम शर्मा के नेतृत्व में महावीर थिएट्रिकल क्लब का गठन किया। शीशमहल के बाहर रामलीला करना शुरू किया जो बाद में अठवाडिय़ा मंदिर के बाहर होने लगी। जिसे लोग छोटी रामलीला के नाम से जानते थे।

एक समय ऐसा था जब बड़ी रामलीला और छोटी रामलीला दोनों मेन बाजार में आमने-सामने हुआ करती थी। आदर्श ड्रामाटिक क्लब के पूर्व प्रधान राकेश गर्ग बबली ने बताया कि एक क्लब से दूसरी बनने की श्रृंखला में इन्हीं क्लबों में से आदर्श थिएट्रिकल क्लब, गणेश थिएट्रिकल क्लब, लक्ष्मनयति रामलीला क्लब, मस्त क्लब व नटराज कला मंच का गठन हुआ।

14 बरस में कौशल्या बने, फिर राम

लव कुश थिएट्रिकल क्लब में कई वर्षों तक राम का पात्र निभाने वाले अमित सिंघल ने अपने रामलीला के दिनों को याद करते हुए कहा कि वर्ष 1998 में लक्ष्मनयति क्लब से निकल कर जब कुछ कलाकारों ने जय भारत कला मंच की शुरुआत की तो लाला जमना दास मंदिर में वो रिहर्सल देखने जाया करते थे। वहीं से उनकी रामलीला मंचन में रुचि पैदा हुई और सबसे पहले निर्देशक रमेश कुमार पाहवा द्वारा उनसे शत्रुघ्न का अभिनय कराया था।

अगले साल ही मात्र 14 साल की आयु में उन्होंने कौशल्या का बेहतरीन रोल निभाया था। उसके बाद भरत, अंगद व् अन्य पात्र निभाने के पश्चात जब जय भारत कला मंच से कुछ कलाकारों ने लव कुश थिएट्रिकल क्लब का गठन किया तो उन्होंने वहां राम का रोल निभाना शुरू किया।

अब दो क्लब, दोनों ही चुप

रामलीला से न केवल रामलीला करने वाले कलाकारों को आध्यात्मिक ज्ञान मिलता है बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी सभ्यता व संस्कृति का ज्ञान होता है। जोकि अब शहर में कहीं भी रामलीला न होने की वजह से अधूरा रह जाता है। अब कोरोना की वजह से रावण दहन न होने से भी क्षेत्र के लोगों में दशहरा पर्व का कोई उत्साह नजर नहीं आ रहा।

उन्होंने क्षेत्र के रामलीला करने वाले सभी कलाकारों व पदाधिकारियों से अपील करते हुए कहा कि सब इकट्ठे होकर इस तरह का कार्यक्रम करने का अवश्य प्रयास करें। अब दो क्लब एक्टिव हैं, लेकिन इस बार दोनों ही राम लीला नहीं कर रहे हैं।

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हरियाणा | दैनिक भास्कर

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