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मानसून की बेरुखी ने चिंता बढ़ाई: देश के 41% इलाके में सामान्य से कम बारिश, इससे बढ़ सकती है महंगाई

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नई दिल्ली9 घंटे पहले

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मानसून की कमजोर बारिश से भारत में रफ्तार पकड़ रहे आर्थिक सुधारों की गति धीमी पड़ने की आशंका है। वर्षा आधारित कृषि पर निर्भर आधे से ज्यादा आबादी वाले देश में खाद्य पदार्थों की कीमतें और बढ़ने की चिंता सताने लगी है। भारत में खुदरा महंगाई पहले ही RBI की 6% की ऊपरी सीमा के पार चल रही है।

बारिश में देरी के कारण बुवाई पर पड़ा असर
आमतौर पर 1 जून को केरल से शुरू होकर देश के अन्य भागों में पहुंचने वाला मानसून शुरुआत में औसत से अधिक बारिश के बाद पिछले तीन सप्ताह से शांत है। भारत के 41% इलाके में औसत से कम वर्षा दर्ज की गई है। इस देरी की वजह से चावल, कपास और सोयाबीन जैसी फसलों की बुवाई पर असर पड़ा है।

मानसून की बेरुखी से आने वाले समय में खेती से आमदनी और ग्रामीण डिमांड में कमी आने की संभावना बढ़ गई है। देश में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर पहले ही कोरोना वायरस की वजह से बदहाली के दौर से गुजर रहे हैं, ऐसे में देश की अर्थव्यवस्था में 18% का योगदान देने वाले एग्रीकल्चर सेक्टर की बदहाली से दिक्कतें और बढ़ सकती हैं।

जुलाई-अगस्त का मानसून सबसे महत्वपूर्ण
बार्कले पीएलसी के अर्थशास्त्री राहुल बाजोरिया का कहना है कि जुलाई-अगस्त का मानसून देश में फसलों की बुवाई और उत्पादन के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। असमान बारिश और कमजोर बोवनी के चलते उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ने का जोखिम है। आरबीआई अगले महीने ब्याज दरों की समीक्षा करने वाला है।

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