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रायसेन में एक अनोखी शोभायात्रा: 40 किलो का हनुमान जी का मुखौटा लगाकर लोग 6 से 7 किलोमीटर तक निकालते हैं शोभायात्रा

रायसेन29 मिनट पहले

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हनुमान जी का मुखौटा लगाकर खड़ा व्यक्ति।

दशहरा पर्व देश में अलग-अलग परंपराओं के तहत मनाया जाता है पर मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में 70 साल से चली आ रही एक परंपरा जो आज भी उसी ढंग से मनाई जाती है। रायसेन जिले में दो जगह और दो पर्व पर एक दशहरे के रावण दहन के दिन तो दूसरी रामलीला मेले के समापन पर रावण दहन के दिन ही 40 किलो का वीर हनुमान का मुखौटा लगाकर शहर के प्राचीन हनुमान मंदिर से शोभायात्रा निकालने की परंपरा आज भी पूरे भक्ति भाव और श्रद्धा के साथ निकाली जाती है।

रायसेन के वार्ड 2 बावड़ी पुरा प्राचीन हनुमान मंदिर से दशहरे पर्व की शाम को एक शोभायात्रा शहर में निकाली जाती है। इस शोभायात्रा में वीर हनुमान का 40 किलो बजनी मुखौटा जो 8 से 10 फीट का होता है, इसे 40 दिन से ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले व्यक्ति अपने सिर पर लगाकर शहर में निकलते हैं। यह यात्रा ढोल-नगाड़ा और वीर हनुमान के जयकारों से गूंजती हुई शहर के विभिन्न मार्गों से रावण दहन स्थल दशहरे मैदान पहुंचती है।

शोभायात्रा का जगह-जगह फूल, मालाओं से और आरती उतार कर स्वागत किया जाता है। यह परंपरा साल में दो बार की जाती है। एक दशहरे के दिन तो दूसरी रामलीला मेले के समापन पर रावण दहन के दौरान।

लगातार छह बार मुखौटा धारण करने वाले स्व. गुट्टी लाल कुशवाह के पुत्र कल्याण कुशवाह बताते हैं कि यह परंपरा रायसेन जिले में एक अब्दुल्लागंज और एक रायसेन शहर में की जाती है। यह परंपरा लगभग 70 साल पुरानी है और अभी तक 70 से 75 लोग अपने सिर पर वीर हनुमान का मुखौटा धारण कर चुके हैं।

कल्याण कुशवाह ने बताया कि मेरे पिता स्व. गुट्टी लाल कुशवाहा द्वारा छह बार मुखौटा धारण किया गया था। मुखौटा का चेहरा पानीपत से पूरी भक्ति भाव श्रद्धा से जय महावीर समिति द्वारा लाया गया था। तब से ही यह परंपरा चली आ रही है।

मुखौटा उठाने से पहले की प्रक्रिया प्राचीन हनुमान मंदिर बावड़ी पुरा में जय महावीर समिति द्वारा जो लोग मुखौटा धारण करने की इच्छा रखते हैं। उनके नाम की 2 पर्ची मंदिर मैं हनुमान प्रतिमा के सामने डाली जाती हैं फिर इन पर्ची को किसी कन्या के हाथ से उठया जाता है।

पहली पर्ची में नाम आने वाले को दशहरा पर मुखौटा लगाया जाता है और वहीं दूसरी पर्ची में नाम आने वाले को रामलीला मेले में रावण दहन के दिन मुखौटा धारण किया जाता है। इस बार शहर के ठाकुर मोहल्ला निवासी दीपू राजपूत द्वारा वीर हनुमान का मुखौटा धारण किया जा रहा है। इससे पहले 40 दिन का ब्रह्मचर्य का पाठ और व्रत किया जाता है। इस दौरान मंदिर पहुंचकर सुबह और शाम कड़ी तपस्या और मेहनत की जाती है। खुद के हाथ से बनाया या अपनी मां और बहन के हाथ का बना भोजन ही किया जाता है।

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मध्य प्रदेश | दैनिक भास्कर

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