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लद्दाख: जंस्कार में पांच मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना का एमओयू, दुरूह भौगोलिक परिस्थितियों में सीईएसएल करेगी काम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू/लेह
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Sun, 06 Jun 2021 01:06 PM IST

सार

लद्दाख प्रशासन सोलर इनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एसईसीआई) और नेशनल थर्मल पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड (एनटीपीसीएल) के साथ मिलकर भी काम कर रहा है।

सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : सोशल मीडिया

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लद्दाख के जंस्कार में पांच मेगावाट क्षमता का सोलर पावर प्रोजेक्ट बनेगा। लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद कारगिल ने इस सौर ऊर्जा परियोजना के लिए शनिवार को विश्व पर्यावरण दिवस पर कनवरजेंस इनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (सीईएसएल) के साथ एमओयू किया।

इस अवसर पर मौजूद उप-राज्यपाल आरके माथुर ने कहा कि प्रदेश को कार्बन न्यूट्रल बनाने की दिशा में यह परियोजना महत्वपूर्ण साबित होगी। जंस्कार की दुरूह भौगोलिक परिस्थितियों में सीईएसएल ने सौर ऊर्जा परियोजना पर काम करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि लद्दाख में सोलर, विंड, हाइड्रो और जियोथर्मल जैसी नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोत हैं।

लातू गांव जैसे और बनें मॉडल
कारगिल के लातू गांव का जिक्र करते हुए उप-राज्यपाल ने कहा कि गांव में सौर ऊर्जा परियोजना का इस्तेमाल पीने और सिंचाई के पानी की आपूर्ति के लिए किया जा रहा है। ऐसे मॉडल अन्य गांवों में भी तैयार करने का प्रयास किया जाना चाहिए।

यह भी पढ़ें- चार साल की बच्ची की मौत: अफसरों पर बरसे फारूक अब्दुल्ला, इस घटना ने घाटी को झकझोर दिया    

विस्तार

लद्दाख के जंस्कार में पांच मेगावाट क्षमता का सोलर पावर प्रोजेक्ट बनेगा। लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद कारगिल ने इस सौर ऊर्जा परियोजना के लिए शनिवार को विश्व पर्यावरण दिवस पर कनवरजेंस इनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (सीईएसएल) के साथ एमओयू किया।

इस अवसर पर मौजूद उप-राज्यपाल आरके माथुर ने कहा कि प्रदेश को कार्बन न्यूट्रल बनाने की दिशा में यह परियोजना महत्वपूर्ण साबित होगी। जंस्कार की दुरूह भौगोलिक परिस्थितियों में सीईएसएल ने सौर ऊर्जा परियोजना पर काम करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि लद्दाख में सोलर, विंड, हाइड्रो और जियोथर्मल जैसी नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोत हैं।

लातू गांव जैसे और बनें मॉडल

कारगिल के लातू गांव का जिक्र करते हुए उप-राज्यपाल ने कहा कि गांव में सौर ऊर्जा परियोजना का इस्तेमाल पीने और सिंचाई के पानी की आपूर्ति के लिए किया जा रहा है। ऐसे मॉडल अन्य गांवों में भी तैयार करने का प्रयास किया जाना चाहिए।

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