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विक्रांत सुसाइड केस: 6 दिन पहले लिखा था सुसाइड नोट, नहीं थे सिग्नेचर; दस आरोपी बरी

जालंधर31 मिनट पहले

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फाइल फोटो

  • कोर्ट में रिकाॅर्डिंग पेश की, मगर आवाज के नमूने फाॅरेंसिक जांच के लिए नहीं भेजे

एडिशनल सेशन जज सरबजीत सिंह धालीवाल की कोर्ट ने लाजपत नगर स्थित गंगा अपार्टमेंट चड्ढा काॅम्प्लेक्स में पांच साल पहले हुए विक्रांत सूर सुसाइड केस में दस आरोपियों को बरी कर दिया है। इनमें पठानकोट के रमेश बब्बर, उनकी पत्नी कमलेश बब्बर, बहू दीपिका बब्बर, जम्मू में रहती बहन मीना कुमारी, बटाला के अश्वनी सहदेव, उनकी पत्नी मीनू सहदेव, बेटा राहुल सहदेव, भाई मुकेश सहदेव, भाभी मीनू सहदेव और मनजीत नगर की सोनिया शामिल हैं। गंगा अपार्टमेंट चड्ढा काॅम्प्लेक्स में रहने वाले विक्रांत सूर ने 18 अगस्त, 2016 को जहर का सेवन कर लिया था। उन्हें नाजुक हालत में सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया था, जहां उनकी मौत हो गई।

बचाव पक्ष की दलील- सिग्नेचर न होना साबित करता है कि सुसाइड नोट फर्जी है

बेटी आरजू ने आरोप लगाया था कि फैमिली विवाद को लेकर उक्त आरोपी पिता को तंग करते थे। दुखी होकर पिता ने जान दी है। थाना-4 में दस लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का केस दर्ज किया गया था। पुलिस ने केस में अश्वनी सहदेव को अरेस्ट कर लिया था, जबकि बाकी को अदालत से बेेल मिल गई थी। पुलिस ने जांच पूरी कर चार्जशीट कोर्ट में फाइल कर दी थी। बचाव पक्ष के एडवोकेट राजेश शर्मा ने कोर्ट में दलील दी कि जो सुसाइड नोट मृतक का बताया गया है, उस पर 12 अगस्त, 2016 की तारीख लिखी गई है, जबकि सुसाइड 6 दिन बाद हुई है। सुसाइड नोट पर सिग्नेचर नहीं है। एफआईआर दर्ज होने के बाद सुसाइड नोट पुलिस के सामने पेश किया था। सुसाइड नोट में पांच नाम रमेश बब्बर, कमलेश बब्बर, दीपिका, सोनिया और अश्वनी सहदेव के नाम लिखे थे।

बचाव पक्ष ने दलील दी कि सुसाइड नोट की राइटिंग मैच की गई है, मगर सिग्नेचर न होना यह साबित करता है कि यह फर्जी है। दलील दी गई कि पुलिस ने उसी आदमी की हस्तलिखित फाॅरेंसिक जांच के लिए भेज दी गई, जिसने यह सुसाइड नोट लिखा है। दावा किया जा रहा है कि सुसाइड नोट तकिये के नीचे से मिला था। सवाल यह है कि क्या 6 दिन से बेड की चादर तक नहीं बदली गई। अदालत में पेश की गई की रिकार्डिंग पर भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि पुलिस ने आवाज के सैंपल लेकर फाॅरेंसिक जांच नहीं करवाई। बचाव पक्ष के एडवोकेट शर्मा की दलील से सहमत होते हुए दस आरोपी कोर्ट ने बरी कर दिए।

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