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विसंगति: चयनित होने के बाद भी केंद्र के कोर्स से वंचित मप्र के हेल्थ वर्कर्स

इंदौर28 मिनट पहले

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भोपाल में मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी से मिला प्रतिनिधि मंडल।

एक ओर चिकित्सा शिक्षा व स्वास्थ्य को लेकर सरकार द्वारा नित नए आयाम के साथ बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण चिकित्सा व स्वास्थ्य से जुड़े डिप्लोमा कोर्स जिसमें मप्र के 30 होनहार हेल्थ वर्कर्स का चयन हुआ लेकिन जब ट्रेनिंग की बारी आई तो मप्र शासन ने यह कहकर अनुमति नहीं दी कि अभी इनकी जरूरत कोरोना को लेकर है इसलिए रिलीव नहीं किया जा सकता। इस अजीब सी परिस्थिति के बीच चयनित हेल्थ वर्कर्स में निराशा है। वे जल्द ही उच्च स्तर पर अपनी बात रखेंगे।

मामला केंद्र सरकार के अधीन नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ ट्रेनिंग एण्ड रिचर्स (मुंबई) का हैइंस्टिट्यूट द्वारा फरवरी में एक साल के डिप्लोमा इन हेल्थ प्रमोशन एजुकेशन (डीएचपीई) कोर्स 2021-22 के लिए सभी राज्यों से स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ पैरामेडिकल स्टाफ, एएनएम, स्टाफ नर्स आदि से आवेदन मंगाए गए थे। इसमें मप्र से भी काफी संख्या में परीक्षार्थी थे। इस कोर्स के लिए पोस्ट ग्रेजुएट सरकारी कर्मचारियों के अलावा अन्य तरह के कोर्स के लिए आवेदन मंगाए गए। बहरहाल, डीएचपीई के लिए आए हजारों आवेदनों में 6 सदस्यीय कमेटी द्वारा मप्र से इंदौर सहित अलग-अलग शहरों के 30 हेल्थ वर्कर्स का चयन किया गया जबकि अन्य में ओडिसा, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों से थे। तब इसे लेकर इन्हें मप्र शासन से एजुकेशन लीव की अनुमति मांगी गई थी जिसके लिए संबंधित शहरों के सीएमएचओ द्वारा दे दी गई।

फिर रिलीव करने पर मना कर दिया

अब चूंकि मुंबई में इस कोर्स की ट्रेनिंग जुलाई में शुरू होना है जिसे लेकर संस्थान द्वारा संबंधितों को बताया गया कि कोरोना संक्रमण ज्यादा होने पर अपने अपने-अपने शहरों से ही ऑन लाइन क्लासेस अटैण्ड करने करें लेकिन संक्रमण कम होने के बाद उन्हें एक साल तक ट्रेनिंग के लिए मुंबई ही रहना होगा। इसके तहत मुंबई में ही आवास, मेस आदि की व्यवस्था है। अब संक्रमण नियंत्रित है तथा इन सभी को मुंबई ट्रेनिंग के लिए बुलाया गया है लेकिन मप्र शासन ने यहां कोरोना महामारी की स्थिति देखते हुए इंस्टिट्यूट को पत्र लिखा है कि डीएचपीई व पीजीडीसीएचसी इन कोर्स के लिए चयनित हेल्थ वर्कर्स को इस साल रिलीव नहीं किया जा सकता। डिप्टी डायरेक्टर, डायरेक्टोरेट ऑफ हेल्थ सर्विस, भोपाल द्वारा 10 जून को लिखे पत्र में पुरानी अनुमति को इनकार समझने का अनुरोध किया गया है। इसे लेकर चयनित हेल्थ वर्कर्स में निराशा है। उनका कहना है कि प्रदेश में अब कोरोना संक्रमण नियंत्रण में है। शासन द्वारा दो साल के एमएससी नर्सिंग के लिए एजुकेशन लीव की दी जा रही है, ऐसे में हमें क्यों वंचित किया जा रहा है।

…तो अगले साल पात्रता से वंचित हो जाएंगे

19 जून को चयनित हेल्थ वर्कर्स ने मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी से मुलाकात की और अनुमति देने के साथ रिलीव करने के लिए निवेदन किया। उन्होंने कहा कि हम लोगों में से कई ऐसे हैं जिनका चयन तीन-चार साल के बाद हुआ है। ऐसे में यह अ‌वसर निकल जाएगा जबकि कुछ की उम्र तो अगले साल कोर्स के लिए निर्धारित 40 वर्ष से अधिक होने के कारण निकल जाएगी और वे पात्र नहीं रहेंगे। इस पर डॉ. चौधरी ने विचार करने का आश्वासन दिया है।

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मध्य प्रदेश | दैनिक भास्कर

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