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वैक्सीन के दाम पर दलील: भारत बायोटेक ने कहा- सरकार को लंबे समय तक 150 रु. में कोवैक्सिन का डोज नहीं दे सकते

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हैदराबाद19 मिनट पहले

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कंपनी का कहना है कि जिन दामों पर केंद्र हमसे वैक्सीन खरीद रहा है, उससे हमारे निवेश की भरपाई नहीं हो पा रही है।

भारत बायोटेक ने कोवैक्सिन के दाम को लेकर मंगलवार को एक बड़ा स्टेटमेंट जारी किया है। कंपनी ने कहा कि सरकार को हम 150 रुपए में कोवैक्सिन की एक डोज दे रहे हैं और ऐसा लंबे समय तक नहीं किया जा सकता है। वैक्सीन निर्माता ने कहा है कि प्राइवेट मार्केट में वैक्सीन की अलग कीमत इससे बनाने की लागत की भरपाई के लिए है।

कीमतों पर भारत बायोटेक की 6 दलीलें

  1. अलग-अलग कीमतें होने के बावजूद हमें लग रहा है कि कोवैक्सिन एक डोज की औसत कीमत 250 रुपए आ रही है। हम जो भी वैक्सीन बना रहे हैं, उसका बड़ा हिस्सा केंद्र को जाएगा। केंद्र सरकार हमसे 150 रुपए में एक डोज खरीद रही है। 25% हिस्सा प्राइवेट मार्केट में जाएगा।
  2. केंद्र सरकार ने निर्देश दिया है कि हमारे अब तक के प्रोडक्शन का 10% हिस्सा प्राइवेट अस्पतालों को जाएगा। बची हुई ज्यादातर वैक्सीन केंद्र और राज्य सरकारों को जाएगी। इन हालात में सप्लाई की जाने वाली वैक्सीन की औसत कीमत 250 रु. से कुछ ही कम होगी।
  3. हमने अब तक वैक्सीन के प्रोडक्शन, डेवलपमेंट, क्लीनिकल ट्रायल और मैन्यूफैक्चरिंग सेटअप में 500 करोड़ से ज्यादा का निवेश अपनी तरफ से किया है। ऐसे में जिन दामों पर केंद्र हमसे वैक्सीन खरीद रहा है, उससे हमारे निवेश की भरपाई नहीं हो पा रही है।
  4. 150 रु. का दाम प्रतिस्पर्धा के लिहाज से सही नहीं है और ये लंबे समय तक नहीं चल पाएगा। ऐसे में प्राइवेट मार्केट में हमें ज्यादा कीमतें रखनी होंगी ताकि लागत की भरपाई की जा सके।
  5. ऐसे उदाहरण भी हैं। जैसे ह्यूमन पापिलोमा वायरस की वैक्सीन की एक डोज गावी अलायंस को 329 रुपए में दी जाती है, पर प्राइवेट मार्केट में इसकी कीमत 3500 रुपए पर डोज है। रोटावायरस सरकार को 60 रुपए में दी जाती है, पर प्राइवेट मार्केट में इसकी कीमत 1700 रुपए है। कोरोना वैक्सीन की अंतरराष्ट्रीय कीमतें 730 से लेकर 2700 रुपए तक है।
  6. प्राइवेट अस्पताल वैक्सीन लेना चाहते हैं या नहीं, ये भी उनकी इच्छा पर निर्भर है। हां, इससे उन नागरिकों को वैक्सीनेशन की सुविधा मिलती है, जो ज्यादा कीमतें देकर ज्यादा सहूलियत हासिल करना चाहते हैं। हमारा मानना है कि प्रोडक्ट की कीमतें तय करने की पॉलिसी इससे जुड़े सभी लोगों के हितों के लिहाज से असंगत है, वह भी तब जब ये वैक्सीन हर नागरिक को मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही है।
एफिकेसी के मामले में कोवैक्सिन को कोवीशील्ड से बेहतर माना जा रहा है।

एफिकेसी के मामले में कोवैक्सिन को कोवीशील्ड से बेहतर माना जा रहा है।

केंद्र ने कोवैक्सिन के 19 करोड़ डोज का ऑर्डर दिया
राज्यों को मुफ्त वैक्सीन देने के ऐलान के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने 44 करोड़ वैक्सीन का ऑर्डर जारी किया था। इसमें 25 करोड़ कोवीशील्ड और 19 करोड़ कोवैक्सिन शामिल हैं। सरकार ने कंपनियों को ऑर्डर की 30% रकम भी एडवांस में जारी कर दी है।

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