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संक्रमण से बचाव की तैयारी: कोरोना का पता लगाने के लिए 18 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से सैंपल लिए

सूरत11 घंटे पहले

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कोरोना महामारी को खत्म करने के लिए विभिन्न प्रकार के रिसर्च किए जा रहे हैं। रिसर्च में कपड़ा समेत अन्य चीज-वस्तुओं और गंदे पानी में भी कोरोना वायरस मिले थे। इस रिसर्च के बाद गुजरात सरकार ने अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से पानी के सैंपल लेने का निर्णय लिया है। नर्मद यूनिवर्सिटी ने सूरत और वडोदरा में 18 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से पानी के सैंपल लिए हैं।

देश में सबसे पहले गंगा नदी में जुड़ने वाले गटर के पानी में कोरोना वायरस मिले थे। इसके बाद गांधीनगर आईआईटी को अहमदाबाद में साबरमती नदी और चंडोला के तालाबों में रिसर्च करने पर कोरोना वायरस मिले थे। गुजरात सरकार ने सूरत और वडोदरा के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के पानी में कोरोना मौजूद है या नहीं इसकी जांच करने का निर्णय लिया था। नर्मद यूनिवर्सिटी को सूरत और वडोदरा में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के पानी के सैंपल लेकर जांच करने का आदेश दिया था।

यूनिवर्सिटी के माइक्रोबायोलॉजी लैब के प्रो. डॉ. प्रवीण दुधागरा ने सूरत के 11 और वडोदरा के 7 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से पानी के सैंपल लिए हैं। इसमें जल्द ही कोरोना वायरस की जांच होगी। डॉ. प्रवीण दुधागरा ने बताया कि कोरोना वायरस के मरीजों के मल-मूत्र त्याग करने से प्लांट के पानी में कोरोना होने की संभावना है। कोरोना के नए वेव को जानने के साथ कम्युनिटी स्प्रेड होने की संभावना के लिए सर्वेक्षण जरूरी है।

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गुजरात | दैनिक भास्कर

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