Breaking News

सरकार को ही नहीं मिल रहा दाम: 2500 रुपए प्रति क्विंटल में धान खरीदकर 1400 रुपए में बेच रही सरकार, मंत्रिमंडलीय समिति ने निर्धारित की दर

रायपुर27 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर खरीदा गए धान को सहेजना सरकार को भारी पड़ रहा है। सरकार ने इसके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य और राजीव गांधी किसान न्याय योजना का इनपुट मिलाकर प्रति क्विंटल 2500 रुपए अदा किए हैं। अब धान को खुले बाजार में बेचने की बात आ रही है तो यह 1350 रुपए से लेकर 1400 रुपए प्रति क्विंटल से अधिक नहीं जा रहा है।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री अमरजीत भगत की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडलीय उपसमिति ने आज बचे हुए धान की नीलामी के लिए नए दरों का अनुमोदन कर दिया। मंत्री अमरजीत भगत ने बताया, तय हुआ है कि मोटा अथवा सरना धान 1350 रुपए प्रति क्विंटल और पतला ग्रेड-ए किस्म का धान 1400 रुपया प्रति क्विंटल से अधिक दर पर नीलाम किया जाएगा। उन्होंने कहा, मार्कफेड के माध्यम से जो 10 लाख मीट्रिक टन धान नीलाम किया जाना था, उसमें से थोड़ा सा हिस्सा बच गया है। आज दरों का अनुमोदन कर दिया गया है। अब नीलामी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सरकार इससे पहले भी इसी दर से धान को खुले बाजार में नीलाम कर चुकी है। मंत्रिमंडलीय समूह की आज की बैठक में वन, आवास एवं पर्यावरण मंत्री मोहम्मद अकबर मौजूद रहे। कृषि मंत्री रविंद्र चौबे और सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल हुए।

इस वर्ष खरीदा गया है रेकॉर्ड धान

राज्य सरकार ने इस वर्ष 20 लाख से अधिक किसानों से 92 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान खरीदा है। पिछले 20वर्षों के दौरान धान की इतनी खरीदी कभी नहीं हुई थी। यह खरीदी ही सरकार के लिए मुसीबत बनी हुई है। राज्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की जरूरत और केंद्रीय पूल में चावल देने के बाद भी सरकार के पास करीब 10 लाख मीट्रिक टन चावल बच रहा है। इसको ही खुले बाजार में बेचने के लिए मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडलीय उपसमिति का गठन किया था।

मार्कफेड के जरिए हो रही है नीलामी

सरकार ने फरवरी 2021 में इस अतिशेष धान को बेचने का फैसला किया था। इस नीलामी का जिम्मा मार्कफेड ने उठाया। एक अंतरविभागीय समिति भी बनाई गई। मंत्रिमंडलीय उपसमिति ने एक न्यूनतम दर तय किया। कहा गया, इससे कम दर नीलामी नहीं होगी। उसके बाद नीलामी की प्रक्रिया शुरू हुई। बताया जा रहा है, किसानों को भुगतान सहित अन्य खर्च मिलाकर सरकार को एक क्विंटल धान की खरीदी पर करीब 3 हजार रुपए खर्च करने पड़े हैं। खुले बाजार में बिकने से उसका आधा दाम भी नहीं मिल रहा है। सरकार का तर्क है कि धान को खराब होते देखने से अच्छा उसका बिक जाना है।

खबरें और भी हैं…

छत्तीसगढ़ | दैनिक भास्कर

About R. News World

Check Also

छग विधानसभा में धर्मांतरण पर हंगामा: BJP विधायकों ने कहा- प्रदेश में बस रहे बांग्लादेशी-रोहिंग्या, सरकार की शह पर आदिवासियों का धर्म बदला जा रहा, स्पीकर ने ‘काम रोको’ ठुकराया

रायपुर42 मिनट पहले कॉपी लिंक छत्तीसगढ़ विधानसभा में मानसून सत्र के तीसरे दिन की कार्यवाही …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *