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सेना वापसी की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है US: पेंटागन के प्रवक्ता जॉन किर्बी बोले- अफगानिस्तान में स्थितियां बदल रहीं, तालिबान लगातार हमले और हिंसा को दे रहा अंजाम

वॉशिंगटनएक घंटा पहले

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जॉन किर्बी ने बताया है कि अमेरिका लगातर ग्राउंड पर बने हालात, अमेरिकी सेना की क्षमता और अफगानिस्तान से बाहर आने के समय संसाधन की जरूरत पर निगरानी रख रहा है। इस तरह के सभी फैसले समय के साथ लिए जा रहे हैं। – फाइल फोटो

अमेरिका अपने सैनिकों को अफगानिस्तान से वापस बुलाने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है। इसके पीछे की वजह तालिबान को बताया जा रहा है। यह जानकारी पेंटागन के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने दी है। हालांकि, किर्बी ने जोर देकर कहा है कि राष्ट्रपति ने सितंबर तक अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना को वापस बुलाने का फैसला किया है। लेकिन अब इसे आने वाले समय में बनने वाली परिस्थितियों के हिसाब से तय किया जा सकता है।

अफगानिस्तान में लगातार बदल रहे हालात
किर्बी ने बताया, ‘अफगानिस्तान में हालात लगातार बदल रहे हैं। तालिबान की तरफ से हमले किए जा रहे हैं। साथ कई तरह की हिंसा की खबर है। उनकी तरफ से कई जिलों के मुख्यालों पर भी छापेमारी की जा रही है। अगर आने वाले समय में किसी भी तरह के बदलाव की जरूरत पड़ती है, तो हम इस प्रक्रिया में लचीलापन बनाए रखना चाहते हैं।

किर्बी ने कहा, ‘हम लगातर निगरानी रखे हुए हैं। ग्राउंड पर क्या हालात है, हम क्या कर सकने में सक्षम हैं और हमें अफगानिस्तान से बाहर आने में किस तरह के संसाधन की जरूरत है। इस तरह के सभी फैसले समय के साथ लिए जा रहे हैं।’

अफगानिस्तान से लगभग आधे सैनिक वापस लौटे
इससे पहले पेंटागन के अधिकारियों ने पिछले हफ्ते बताया था कि तालिबान और अलकायदा से लड़ाई लड़ने और अफगानिस्तान की सेना की मदद करने के बाद अप्रैल में राष्ट्रपति बाइडेन का आदेश लगभग आधा पूरा हो गया है। राष्ट्रपति बाइडेन के फैसले के समय अफगानिस्तान में 2,500 सैनिक और 1,600 से कॉन्ट्रेक्टर थे। इनमें अधिकतर अमेरिकी नागरिक थे। पेंटागन पहले ही अपने कई प्रमुख ठिकानों को अफगानिस्तान के सुरक्षा बल को सौंप चुका है। साथ ही सैकड़ों की संख्या में तैनात कार्गो प्लेन को हटा दिया है।

अफगानिस्तान की सेना का लगातार समर्थन करते रहेंगे
किर्बी ने कहा कि अमेरिकी फोर्स अफगानिस्तान की सेना का लगातार समर्थन करती रहेगी। जब तक अफगानिस्तान में हमारे पास क्षमता है, हम अफगानिस्तान की सेना को सहायता देते रहेंगे। लेकिन जैसे ही सेना अफगानिस्तान से पूरी तरह से हट जाएगी तब ये क्षमताएं अपने आप खत्म हो जाएंगी और उपलब्ध नहीं होंगी।

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