Breaking News

स्कूल में बकरीद मनाने पर हंगामा: बच्चों को हरे कपड़े पहनाने और राष्ट्रगान गाने से रोकने पर भाजपा पार्षद ने किया बवाल; प्रिंसिपल बोलीं- हम जन्माष्टमी भी मनाते हैं

रायपुर23 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

रायपुर के मोवा स्थित आदर्श स्कूल कैंपस में मंगलवार की सुबह भाजपा पार्षद विश्वदिनी पांडे, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और अन्य हिंदू वादी संगठन के नेता पहुंच गए। नारे बाजी होने लगी- इस्लामीकरण नहीं सहेंगे…भारत माता की जय…। स्कूल में मौजूद स्टाफ भी हड़बड़ा गया। ये सब कुछ स्कूल में वर्चुअल बकरीद सेलीब्रेशन को लेकर हुआ। एक दिन पहले पैरेंट्स को स्कूल की तरफ से मैसेज भेजा गया था। पार्षद ने फोन पर स्कूल की प्रिंसिपल से तीखी बहस भी की।

इस मैसेज की वजह से हुआ बवाल।

इस मैसेज की वजह से हुआ बवाल।

बकरीद से क्या सीख मिलेगी बच्चों को
भाजपा पार्षद विश्वदिनी पांडे ने कहा कि सोमवार शाम परिजनों को स्कूल की तरफ से मैसेज भेजा गया था। इसमें लिखा था कि बच्चे हरे कपड़े पहने, कोई राष्ट्रगान नहीं गाएगा। इस पर मुझे कुछ अभिभावकों ने शिकायत भेजी। बकरीद तो कुर्बानी का त्योहार है। इसमें बच्चों को क्या सीख देंगे। इस्लामीकरण नहीं होने देंगे। स्कूल के प्रबंधन से इसे लेकर बात की, कहा कि दीवाली-ईद तो फिर समझ में आते हैं, पर बकरीद हम मनाने नहीं देंगे, इसलिए विरोध किया। स्कूल के कैंपस में ही जन-गण-मन गाया और बकरीद की इस वर्चुअल क्लास को रद्द करवाया।

स्कूल में नारेबाजी करते हिंदू संगठन के नेता।

स्कूल में नारेबाजी करते हिंदू संगठन के नेता।

प्रिंसिपल ने बताया यहां रामायण का मंचन भी होता है
स्कूल की प्रिंसिपल सविता चतुर्वेदी ने बताया कि हम पिछले 10 सालों से स्कूल में ओणम, दशहरा, ईद, जन्माष्टमी हर त्योहार मनाते हैं। सभी त्योहारों के पीछे की पारंपरिक कहानी और मान्यता को बताया जाता है, इसका मकसद सिर्फ इतना ही है कि बच्चों को हर धर्म-संस्कृति के बारे में पता चले। राष्ट्रगान न गाने के मुद्दे पर प्रिंसिपल ने कहा कि चूंकि हर क्लास और असेंबली अब ऑनलाइन हो रही है। बच्चे अपने घरों में कई बार बैठे-बैठे राष्ट्रगान गाने लगते हैं, उच्चारण गलत होते हैं, टाइमिंग गलत होती है, इसलिए हम वर्चुअल असेंबली में इसका ऑडियो प्ले करते हैं।

तस्वीर साल 2019 के जन्माष्टमी सेलीब्रेशन की है।

तस्वीर साल 2019 के जन्माष्टमी सेलीब्रेशन की है।

मैसेज में राष्ट्रगान न गाने का आशय इसे ऑडियो प्ले करने से था। बकरीद पर भी वर्चुअल असेंबली थी। हरे कपड़े इस वजह से पहनने को कहा गया कि वो सिम्बॉलिक फील को समझें। बसंत पंचमी में बच्चों को हम पीले वस्त्र भी पहनने को कहते हैं। स्कूल में रामायण का भी मंचन होता है, जन्माष्टमी पर बच्चे कृष्ण बनते हैं। ऐसे में बकरीद पर हंगामा करना और इस्लामीकरण से जोड़कर देखना दुखद है।

खबरें और भी हैं…

छत्तीसगढ़ | दैनिक भास्कर

About R. News World

Check Also

चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज विवाद: विधानसभा में अधिग्रहण विधेयक पेश होने से पहले CM से मिले मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थी, कहा- सरकार के कदम से सुरक्षित हाेगा उनका भविष्य

रायपुर2 घंटे पहले कॉपी लिंक विधानसभा जाने से पहले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चंदूलाल चंद्राकर …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *