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हाथ की इम्प्रूवमेंट और स्ट्रेंथ का पता लगाने को: फीजियोथैरेपिस्ट को मैनुअली डाटा लेकर नहीं करनी होगी अलग-अलग मशीनों से मापने की मशक्कत, ‘मोशन सेंसिंग ग्लव्स’ को मिला 20 साल के लिए पेटेंट

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  • Physiotherapist Will Not Have To Take Data Manually, The Effort Of Measuring With Different Machines ‘motion Sensing Gloves’ Got Patent For 20 Years.

चंडीगढ़एक घंटा पहले

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ये ग्लव्स खासतौर पर लंबी बीमारी वाले पेशेंट्स के लिए है। खासतौर पर बर्न या नर्वस सिस्टम संबंधित प्रॉब्लम्स में। इसका ट्रायल PGI में पेशेंट्स पर भी किया जा चुका है।

किसी एक्सीडेंट, नर्वस सिस्टम की प्रॉब्लम या जलने के बाद अगर फीजियोथैरेपी चल रही है, तो फीजियोथैरेपिस्ट को मैनुअली डाटा लेकर विभिन्न मशीनों से मापने की मशक्कत नहीं करनी होगी।

हाथ की इम्प्रूवमेंट और स्ट्रेंथ का पता लगाने के लिए यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (UIET) की टीम ने ‘मोशन सेंसिंग ग्लव्स’ तैयार किया था, जिसका पेटेंट अब डेवलप करने वाली टीम को मिल चुका है। अगले 20 साल तक यह टेक्नोलॉजी उनके पास पेटेंटेड है।

इसे प्रोडक्ट के तौर पर मार्केट में उतारने के लिए मिनिस्ट्री ऑफ ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट (MHRD) ने 4 लाख रुपए की ग्रांट दी है, जिसके लिए पेटेंट जरूरी था। MHRD ने 3400 आइडिया में से इसे चुना था और यह टीम देश में दूसरे स्थान पर रही थी।

अब स्टार्टअप शुरू करने वाली टीम इसका उत्पादन शुरू करेगी और जल्द यह प्रोडक्ट बाजार में होगा। इसे स्टार्टअप के ताैर पर बाजार में उतारेगी जन्नत, साहिल, राशि, वरुणा और वास्तविकता की टीम।

मोटिवेशन

UIET के इनोवेशन रिसर्च सेंटर में PGI के डॉ. हसन ने करीब तीन साल पहले विजिट किया तो इसे एक प्रोजेक्ट के तौर पर बनाने को कहा था।

टारगेट

फीजियोथेरैपी के लिए रिकवरी को मापना काफी मुश्किल होता है। इसमें मैनुअली डाटा लेने के बाद कई प्रोसेस से गुजरते हुए सही स्थिति पता लगती है।

ऐसे काम करेगा

ये ग्लव्स हाथ की उंगलियों और हाथ की स्ट्रेंथ को तुरंत बता देगा। मरीज को सिर्फ मुट्‌ठी बनानी होगी। पूरा डाटा और जानकारी एप में आ जाएगी। इसका एक्सेस डॉक्टर और पेशेंट दोनों के पास रहेगा। रेगुलर रिपोर्ट भी हर महीने ई-मेल कर दी जाएगी।

ये ग्लव्स खासतौर पर लंबी बीमारी वाले पेशेंट्स के लिए है। खासतौर पर बर्न या नर्वस सिस्टम संबंधित प्रॉब्लम्स में। इसका ट्रायल PGI में पेशेंट्स पर भी किया जा चुका है। पेशेंट इसको अपने घर पर रख सकते हैं। इससे पेशेंट की रिकवरी और प्रोग्रेस घर में कंप्यूटर या TV स्क्रीन पर देखी जा सकेगी।

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चंडीगढ़ | दैनिक भास्कर

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