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​​​​​​​​सफल बिजनेसवुमन इंदिरा नूयी ने बताए अपने संस्मरण: बोलीं – काम से लगाव अच्छा, पर परिवार व बच्चों को अहसास दिलाएं कि जिंदगी में वे बेहद खास हैं, सफलता में उनका भी हिस्सा

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  • Successful Businesswoman Indra Nooyi Shares Her Memoirs; Said Love Of Work Is Good, But Make Family And Children Feel That They Are Very Special In Life, They Also Share In Success

6 घंटे पहलेलेखक: एस.मित्रा कालिता

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इंदिरा नूयी ने फॉर्चून-500 कंपनी की सबसे लंबे समय तक सीईओ रहकर टाइम्स व फोर्ब्स में जगह बनाई है।

सफल बिजनेसवुमन, पद्म विभूषण, फॉर्चून-500 कंपनी की सबसे लंबे समय तक सीईओ रहकर टाइम्स व फोर्ब्स में जगह बनाने वाली इंदिरा नूयी की सफलता किसी परिचय की मोहताज नहीं है। पर इस सफलता के पीछे छिपी अथक मेहनत, असीम त्याग और अद्वितीय सहयोग भी है। चेन्नई के ब्राह्मण परिवार से पेप्सिको की प्रेसिडेंट बनने तक के इस संघर्ष भरे सफर और महत्वपूर्ण पलों को नूयी ने संस्मरण ‘माय लाइफ इन फुल: वर्क, फैमिली एंड अवर फ्यूचर’ में सहेजा है। पढ़िए इनसे मिले सबक, नूयी के शब्दों में…

1. काम से प्यार : उत्पादों की पैकेजिंग और प्लेसमेंट समझने के लिए सुपरमार्केट जाकर उनके शेल्फ तक देखे। बच्चों की बर्थडे पार्टियों में गई ताकि लोगों को समझा सकूं कि वे सोडा छोड़कर पेप्सिको के सेहतमंद उत्पाद अपनाएं।

2. परिवार को भरोसे में लेना : बड़ी जिम्मेदारियों के चलते कई बार छुटि्टयां रद्द करनी पड़ीं। बच्चों से दूर रहना पड़ा। हम जिन्हें प्यार करते हैं, उनके साथ साझा करना चाहिए कि हम पर क्या जिम्मेदारियां हैं, खासकर बच्चों से… कि आप उनसे क्यों दूर हैं। मैंने उन्हें भरोसा दिलाया कि मैं उन्हें प्यार करती हूं, पर काम की फिक्र भी है।

3. पुरुषों का सपोर्ट : घर और बाहर दोनों ही जगह पुरुषों का सपोर्ट अहम है। मैं गर्भवती थी, सफर संभव नहीं था, तब सीईओ बिल रॉथ ने पूरी टीम को शिकागो लाने के लिए दो प्लेन किराए पर लिए, ताकि मीटिंग में मैं भी शामिल रहूं। शादी के बाद ससुर और पति का भी सहयोग मिला। ससुर ने मुझसे कहा कि नौकरी मत छोड़ो, इतनी पढ़ाई की है, तो उसका इस्तेमाल करो। हम हरसंभव मदद करेंगे।

4. केयर प्राथमिकता हो : महिलाएं वर्कफोर्स से बाहर न हो इसके लिए परिवार अनुकूल नीतियों पर ज्यादा काम करना होगा। काम के चलते महिलाओं का परिवार न बढ़ाना भी चिंताजनक है। यह अर्थव्यवस्था के लिए घातक साबित होगा।

5. उद्देश्य ही सब कुछ : आधुनिक वर्कफोर्स में ‘उद्देश्य’ ही अकेला प्रेरक है। और इसके साथ परफॉर्मेंस जोड़ दिया जाए तो न सिर्फ कारोबारी बल्कि व्यक्तिगत जीवन में अभूतपूर्व बदलाव होंगे। हमने पेप्सिको में इसी कंसेप्ट को अपनाकर सफलता हासिल की।

मां की सीख- अपना ‘ताज’ गैराज में छोड़कर आया करो

बात उस वक्त की है कि जब मेरा पेप्सिको प्रेसिडेंट बनना लगभग तय हो गया था। एक रात मैं घर पहुंची तो मां से कहा, ‘मेरे पास बड़ी खुशखबरी है, मां ने कहा- बाद में सुनाना, पहले मुझे बाजार से दूध लाकर दो।’ मां बेहद सख्त थीं, उन्होंने साफ कहा था,‘प्रेसिडेंट तो तुम ऑफिस में हो, पर घर आने के बाद तुम एक पत्नी, मां और बेटी हो।

ये सारे किरदार तुम्हारे ही हैं। ये पद कोई दूसरा नहीं ले सकता। इसलिए बेहतर यही होगा कि अपना ‘ताज’ गैराज में छोड़कर आया करो। सीख यह मिली कि मां के अलावा कोई और आपके साथ इतना कठोर व ईमानदार नहीं हो सकता।

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